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व्याकरण

किसी भी  भाषा  के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन व्याकरण (ग्रामर) कहलाता है। व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा किसी  भाषा  का शुद्ध बोलना, शुद्ध पढ़ना और शुद्ध लिखना आता है। किसी भी भाषा के लिखने, पढ़ने और बोलने के निश्चित नियम होते हैं। भाषा की शुद्धता व सुंदरता को बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम भी व्याकरण के अंतर्गत आते हैं। व्याकरण भाषा के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी "भाषा" के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन "व्याकरण" कहलाता है, जैसे कि शरीर के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन "शरीरशास्त्र" और किसी देश प्रदेश आदि का वर्णन "भूगोल"। यानी व्याकरण किसी भाषा को अपने आदेश से नहीं चलाता घुमाता, प्रत्युत भाषा की स्थिति प्रवृत्ति प्रकट करता है। "चलता है" एक क्रियापद है और व्याकरण पढ़े बिना भी सब लोग इसे इसी तरह बोलते हैं; इसका सही अर्थ समझ लेते हैं। व्याकरण इस पद का विश्लेषण करके बताएगा कि इसमें दो अवयव हैं - "चलता" और "है"। फिर वह इन दो अवयवों का भी विश्लेषण...

प्रेमचंद

प्रेमचंद    हिन्दी  और  उर्दू  के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं  मूल नाम  धनपत राय श्रीवास्तव , प्रेमचंद को  नवाब राय  और  मुंशी प्रेमचंद  के नाम से भी जाना जाता है।  उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर  बंगाल  के विख्यात  उपन्यासकार   शरतचंद्र चट्टोपाध्याय  ने उन्हें  उपन्यास सम्राट  कहकर संबोधित किया था।  प्रेमचंद ने हिन्दी  कहानी  और  उपन्यास  की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की  यथार्थवादी परंपरा  की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और...

सूरदास

सूरदास  का नाम  कृष्ण  भक्ति की अजस्र धारा को प्रवाहित करने वाले भक्त  कवियों  में सर्वोपरि है।  हिन्दी साहित्य  में भगवान  श्रीकृष्ण  के अनन्य उपासक और  ब्रजभाषा  के श्रेष्ठ कवि महात्मा सूरदास  हिंदी साहित्य  के  सूर्य  माने जाते हैं। हिंदी कविता कामिनी के इस कमनीय कांत ने हिंदी भाषा को समृद्ध करने में जो योगदान दिया है, वह अद्वितीय है। सूरदास हिंन्दी साहित्य में  भक्ति काल  के सगुण भक्ति शाखा के कृष्ण-भक्ति उपशाखा के महान कवि हैं। रचनाएँ सूरदास जी द्वारा लिखित पाँच ग्रन्थ बताए जाते हैं: (१)  सूरसागर  - जो सूरदास की प्रसिद्ध रचना है। जिसमें सवा लाख पद संग्रहित थे। किंतु अब सात-आठ हजार पद ही मिलते हैं। (२)  सूरसारावली (३)  साहित्य-लहरी  - जिसमें उनके कूट पद संकलित हैं। (४)  नल-दमयन्ती (५)  ब्याहलो

अच्छा शिक्षण की विशेषताओं

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फ़्रीड्रिक फ्रोबेल का किंडरगार्टन (बालवाड़ी) की संकल्पना

फ़्रीड्रिक विलियम अगस्त फ्रोबेल    जर्मनी  के प्रसिद्ध  शिक्षाशास्त्री  थे। वे पेस्तालोजी के शिष्य थे। उन्होने  किंडरगार्टन (बालवाड़ी)  की संकल्पना दी। उन्होने शैक्षणिक खिलौनों का विकास किया जिन्हें 'फ्रोबेल उपहार' के नाम से जाना जाता है। शिक्षा जगत में फ्रोबेल का महत्वपूर्ण स्थान है। बालक को पौधे से तुलना करके, फ्रोबेल ने बालक के स्वविकास की बात कही वह पहला व्यक्ति था, जिसने प्राथमिक स्कूलों के अमानवीय व्यवहार के विरूद्ध आवाज उठाई और एक नई शिक्षण विधि का प्रतिपादन किया। उसने आत्मक्रिया स्वतन्त्रता, सामाजिकता तथा खेल के माध्यम से स्कूलों की नीरसता को समाप्त किया। संसार में फ्रोबेल ही पहला व्यक्ति था जिसने अल्पायु बालकों की शिक्षा के लिए एक व्यवहारिक योजना प्रस्तुत किया। उसने शिक्षकों के लिए कहा कि वे बालक की आन्तरिक शक्तियों के विकास में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें, बल्कि प्रेम एवं सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करते हुए बालकों को पूरी स्वतन्त्रता दें। शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार का परिवर्तन लाने के लिए फ्रोबेल को हमेशा याद किया जायेगा

महात्मा गाँधी

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महात्मा गाँधी' का जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 में पोरबंदर में हुआ था। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। वहां से लौटने पर उन्होंने वकालत प्रारंभ की। गांधीजी का सार्वजानिक जीवन दक्षिण अफ्रीका में प्रारंभ हुआ। उन्होंने देखा की भारतीयों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने भारतीयों की सहायता की। उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन प्रारंभ किया। उन्होंने अनेक कष्ट सहे। उनको अपमानित किया गया। अंत में उन्हें सफलता मिली। गांधीजी वापस भारत आये और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। वह कई बार जेल गए। अब सारा देश उनके साथ था। लोग उन्हें राष्ट्रपिता कहने लगे। अंत में भारत को 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई। गांधीजी सादा जीवन बिताते थे। उन्होंने हमको अहिंसा का पाठ पढाया। वह एक समाजसुधारक थे। उन्होंने छुआ-छूत को दूर करने का प्रत्यन किया। 30 जनवरी, 1948 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गयी।

मांटेसरी पद्धति

मांटेसरी पद्धति  (Montessori method) ढ़ाई से 6 वर्ष के बालकों के हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली पद्धति है जिसका विकास बीसवीं सदी के प्रारंभ में डॉ॰  मारिया मांटेसरी  द्वारा हुआ।  रोम विश्वविद्यालय  में मंदबुद्धि बालकों की चिकित्सा का कार्य करते हुए उनका ध्यान उक्त बालकों की शिक्षा की ओर गया और उन्होंने मांटेसरी पद्धति का विकास किया जो बाद में सामान्य बुद्धि बालकों के शिक्षा के लिये भी उपयोग में लाई गई। इस पद्धति पर चलाया जानेवाला पहला स्कूल अर्ध बर्बर श्रमिक बालकों के लिये सेन लोरेंजो में 6 जनवरी 1907 को खुला। 1913 में प्रथम अंतरराष्ट्रीय मांटेसरी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें अमरीका, अफ्रीका, भारत तथा कई यूरोपीय देशों के लोग सम्मिलित हुए। डॉ॰ मांटेसरी स्वयं अपने दत्तक पुत्र मारिओ मांटेसरी के साथ जीवन भर इसके प्रसार में लगी रहीं।